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नदी में आग व धमाके की घटना के बारे में पहली बार सुना

उज्जैन। त्रिवेणी स्टापडेम पर नदी में पिछले दिनों धमाके के साथ आग निकलने की जानकारी ग्रामीणों ने प्रशासन को दी थी। कुछ लोगों ने इसके वीडियो भी बनाकर वायरल किये जिसके बाद कलेक्टर द्वारा भू वैज्ञानिक व रसायनिज्ञ विभाग भोपाल को जानकारी से अवगत कराने के साथ जांच हेतु पत्र लिखा था।उक्त टीम द्वारा विस्फोट वाले स्थान से सेम्पल लिये लेकिन ठोस जानकारी हाथ नहीं लगी। आज सुबह देहरादून से ओएनजीसी की दो सदस्यीय विशेषज्ञों की टीम त्रिवेणी स्टापडेम पहुंची और 8 स्थानों से पानी व मिट्टी के सेम्पल लिये।

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15 दिन बाद रिपोर्ट आयेगी…


विशेषज्ञों द्वारा त्रिवेणी स्टापडेम के अलग-अलग स्थानों से कुल 8 सेम्पल पानी व मिट्टी के लिये है। विशेषज्ञों का कहना है कि नदी से ली गई मिट्टी गीली है। उसे सुखाने के बाद देहरादून की लैब में टेस्ट किया जायेगा। जिसकी रिपोर्ट करीब 15 दिन में आने की संभावना है। रिपोर्ट से सीधे कलेक्टर को ही अवगत कराया जायेगा।

यह था मामला : 

पिछले दिनों त्रिवेणी स्टापडेम की एक ओर शिप्रा नदी में ग्रामीणों व आसपास के रहवासियों ने धमाके की आवाज सुनकर आग निकलते देखा था। ग्रामीणों का कहना था कि दोपहर से शाम के बीच उक्त घटना होती है। कुछ दिनों के अंतराल में यह धमाके के साथ पानी से आग निकलने और पानी उछलने की घटना होने के साथ पानी का रंग बदलने की बात सामने आई थी।

आग निकली वहां से 500 मीटर दूर तक सेम्पल लिये

ओएनजीसी देहरादून से आये डीजीएम केमिस्ट्री अमित कुमार सक्सेना, भू वैज्ञानिक अजय एम. लाल ने सुबह त्रिवेणी स्टापडेम पहुंचकर जांच शुरू की। सबसे पहले जिस स्थान पर आग व धमाके लोगों ने देखे वहां से पानी को तल से हिलाकर बाटल में सेम्पल भरे गये फिर उसी जगह नदी के तल से मिट्टी के सेम्पल पोलिथीन में लिये गये। आग लगने वाले नदी के क्षेत्र से 4 सेम्पल लिये उसके बाद 500 मीटर दूर नदी किनारे से भी विशेषज्ञों ने सेम्पल लिये।

नदी में आग व धमाके की घटना पहली बार सुनी


उज्जैन पहुंचे ओएनजीसी के डीजीएम केमिस्ट्री अमित कुमार श्रीवास्तव ने चर्चा में बताया कि नदी में आग व धमाके की घटना के बारे में पहली बार सुना। वायरल वीडियो भी देखा है, लेकिन नदी में तेल या गैस की संभावना के कारण ऐसी घटना हो रही है यह जरूरी नहीं। केमिकल अथवा अन्य कारणों से भी इस प्रकार की घटना हो सकती है। ओएनजीसी द्वारा तेल व गैस भंडार की संभावना की जांच की जाती है। हमारी जांच भी उक्त दोनों बिंदुओं पर ही आधारित होगी।

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