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शहर के साहित्यकारों ने चर्चा गोष्ठी में लिया हिस्सा

गया। आजाद पार्क स्थित जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन भवन के डॉ मंजु करण सांस्कृतिक सभागार में साहित्यकार प्रवीण परिमल की नव- प्रकाशित तीसरी काव्य पुस्तक प्रेम का रंग नीला पर चर्चा-गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता सम्मेलन के सभापति सुरेन्द्र सिंह सुरेन्द्र व संचालन महामंत्री सुमन्त ने किया।


उप सभापति अरुण हरलीवाल ने सर्वप्रथम आगत अतिथियों का स्वागत किया, साथ ही काव्य पुस्तक प्रेम का रंग नीला पर चर्चा के लिए विषय प्रवर्तन भी किया। कवि प्रवीण परिमल ने प्रेम का रंग नीला से तीन प्रतिनिधि कविताओं का पाठ किया। राजीव रंजन, प्रगतिशील लेखक संघ के जिला अध्यक्ष कृष्ण कुमार, डॉ सच्चिदानन्द प्रेमी, साहित्य महापरिषद के अध्यक्ष डॉ राम सिंहासन सिंह, सम्मेलन के पूर्व सभापति डॉ रामकृष्ण ने चर्चा गोष्ठी में भाग लिया।


डॉ रामकृष्ण ने कहा कि प्रवीण परिमल की छन्दोबद्ध और छंदमुक्त दोनों तरह की कविताएँ प्रभावी बिम्बों से सम्पन्न हैं। डॉ राम सिंहासन सिंह ने उनकी कविताओं में काव्यत्मकता, मनोवैज्ञानिकता और दार्शनिकता को इंगित किया। डॉ सच्चिदानन्द प्रेमी ने कहा कि परिमल जी कविता के व्याकरण में एक सिद्ध हस्ताक्षर हैं। कृष्ण कुमार ने कहा कि परिमल की ये कविताएँ हमारे कविता समय की एकरसता को तोड़ने में सक्षम हैं।

राजीव रंजन ने कहा कि प्रेम कविता लिखते हुए कोमल भावों की मौलिकता और सहजता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। प्रवीण जी इस कला में प्रवीण हैं। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में जनकवि सुरेन्द्र सिंह सुरेन्द्र ने प्रवीण जी की प्रस्तुत कविताओं को उनके भोगे हुए जीवन का हिस्सा और किस्सा माना। अंत मे प्रवीण परिमल ने उपस्थित साहित्यकारों एवं सहित्यानुरागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।

गया (बिहार) से अश्वनी कुमार की रिपोर्ट

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