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लेखिका -दीप्ति डांगे, मुम्बई

 15 अगस्त 2014 को लाल किले से मोदीजी ने  एक मंत्र दिया(स्वच्छ भारत अभियान नारा ) “ना गदंगी करेंगे ना करने देंगे ” और इस अभियान को “स्वच्छ भारत अभियान” का नाम दिया। ये मंत्र मिलते ही ऐसा लगा जैसे पूरे देश मे भूकंप आगया सारे देशवासी सोते से जाग गए।हर जगह बस लोग झाड़ू उठाकर अपने अपने आस पास की जगह साफ करने लगे।


सेलिब्रिटीज और नेतायो हर जगह अपने साथ कुछ लोगो को लेकर झाड़ू लगते नजर आने लगे  ओर सोशल मीडिया मे फ़ोटो पोस्ट करने लगे।ऐसा लगा अब तो बस पूरा देश बिल्कुल शीशे की तरह चमकने लगेगा।


एक साल बाद, जुलाई महीने में, जैसा कि आप सभी जानते है मुम्बई की बारिश के बारे मे, मुझे श्रीमती वर्मा जी मिल गयी टाइगर (उनका कुत्ता) के साथ और लोगो पर गुस्सा करते हुए सबको कचरा फैकने से मना कर रही थी। ये देख मैं बहुत खुश हुई क्या बात है!! लोग इतने उत्साहित है भारत को स्वच्छ बनाने के असली हीरो तो ये है। मैंने उनसे पूछा कि आप इतने गुस्से मे क्यों है? कहने लगी क्या बोलू मोदीजी स्वच्छ भारत की बात करते है ये लोग अपने एरिया को ही गंदा कर रहे है।

बरसात मे ये कचरा फैलेगा, कितने कीटाणु पनपे और कितनी बीमारियां फैलेगी। मैंने बोला बिल्कुल सही कहा। मैंने पूछा क्या टाइगर को घुमाने के लिये लायी है? वो दुखी होकर बोली क्या बताऊँ ये लोग हर जगह गंदा करते है तो टाइगर भी दुखी है इसलिये पोट्टी नही कर रहा तो बार बार उसको लाती हूँ इन लोगो को मना कर रही हूँ कि कचरा मत फेको ताकि यह टाइगर पोट्टी कर सके।


उस समय दिमाग मे एक ही बात आई। इट हपन्स ओनली इन  इंडिया।


हमारे ही एरिया मे मि. पाटिल और मि. सावंत रहते है उनके संबंध और हालात वैसे ही है जैसे भारत और पाकिस्तान की। मि. पाटिल को मुम्बई मे गांव जैसा माहौल चाहिये इसलिए वो रोज अपने बंगले में नहाने के लिये पानी चूल्हे पर गर्म करते है और मि. सावंत रोज अपना कचरा और गंदगी अपने गार्डन मैं जलाते है जो मि. पाटिल की घर से जुड़ा है। एक दिन मि. पाटिल बोलने लगे की उनके फल जो उनके घर मे उग रहे है वो सड़ जाते है मि. सावंत के कचरा जलाने के कारण। लेकिन वो खुद ये भूल गए कि वो भी तो वही कर रहे है।


दोहरापन साफ सफाई, स्वच्छ भारत रखने की उम्मीद दुसरो से करते है। दुसरो को बोलते है पर हम खुद नही सोचते कि हम खुद ही सबसे बड़े, गंदगी फैलाने के, ब्रांड एंबेसडर हैं।


यहाँ खुदा है, वहां खुदा है, आस-पास हर जगह खुदा ही खुदा है, और जहाँ खुदा नहीं है, वहां कल जरूर खुदेगा “गड्ढा ” !!
ये शायरी हम सभी बचपन से सुनते आ रहे है। और अब ये भारत की सड़कों की सच्चाई बन चुकी है। जैसे ही कही भी सड़क बन कर तैयार होती है वैसे सारे विभाग जाग जाते है और उस सड़क को खोदना शुरू हो जाता है।फिर गड्ढे, सड़क पर मिट्टी, रेत, पत्थर  महीनों तक वही पड़ा रहता है।वो मिट्टी के ढेरों पर लोग कचरा फैकने शुरू कर देते है, जानवर  वहां पर शौच करते है।


भारतीय सरकार का कहना कि स्वच्छ भारत अभियान काफी सफल रहा आज 90% घरों में शौचालय है। सुनकर अच्छा लगता है कि दुनिया मे हमारी छवि सुधर रही।पर गाँवो मे आज भी बुजुर्ग  शौचालयों को अपने घर का हिस्सा नही मानते।
सबसे पहले स्वच्छ भारत का नारा गांधीजी ने आजादी से पहले दिया था।उनका मानना था कि  “जब तक अपनी गंदी आदतों से छुटकारा नहीं पा जाते और शौचालयों में सुधार नहीं कर लेते तब तक स्वराज्य का कोई महत्व नहीं हो सकता।

उन्होंने साफ पानी पीने, अच्छी हवा में सांस लेने और खुले में शौच से निपटने के लिए स्पष्ट तरीकों का पालन करके महामारी को भारत से उखाड़ फेंकने पर जोर दिया।” जो एक सपना ही रह गया। देश आजाद हो गया लेकिन जिस युद्ध स्तर पर साफ सफाई का कार्ये होना था वो नही हुआ पर जब मोदीजी ने नारा दिया तो लोगो में जागरूकता आयी और युवा पीढ़ी ने खुद को बदलना शुरू किया।

जो लोग इधर उधर पानी की बोतल और कचरा फैकते थे अब वो या तो कचरे का डब्बा ढूढ़ते है या अपने पास रखने लगे है। लोगो की सोच बदली है। पर अभी भी बहुत लोग खुद को नही बदल पा रहे।इसके लिए म्युनिसिपल को भी अपने  कार्ये करने के तरीकों मे बदलाव करना होगा।


यही आशा करते है जो आज नही बदले वो कल बदलेंगे, क्योंकि बदलाव की बया चल पड़ी है। परिवर्तन धीरे धीरे होता है।स्वच्छता सतत् चलने वाला विषय है । आशा है कि देश की जनता इस अभियान को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना कर भारत को स्वच्छ एवं सुन्दर और श्रेष्ठ भारत बनायेगी ।


नोट – नाम काल्पनिक है।
रिपोटर चंद्रकांत सी पूजारी

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