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नागदा । केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा श्रम कानूनों में किए जा रहे श्रमिक विरोधी बदलावों के विरोध में राष्ट्रपति के नाम विभिन्न श्रम संगठनों ने ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी के माध्यम से दिया।

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केमिकल समाजवादी मजदूर युनियन के बैनरतले आनन्द दीक्षित, प्रहलाद शर्मा, बीके सविता, ओमप्रकाश गुप्ता, ग्रेसिम एचएमएस से जगमालसिंह राठौड, राजेन्द्र अवाना, अशोक शर्मा, सत्यनारायण पारिक, राजेन्द्र शर्मा, रमेश पाल, भवानीसिंह आदि द्वारा प्रेषित ज्ञापन में मांग की गई कि औद्योगिक रोजगार स्थाई आदेश कानून में 300 से अधिक कर्मचारियों के लिए छूट दी गई है

यह बहुत ही श्रमिकों के लिए घातक सिद्ध होगा, वर्तमान में यह कानून 100 श्रमिक और कई राज्यों में 50 श्रमिक पर है। वास्तव में 2 एनसीएल में 50 से 20 श्रमिकों से स्थाई आदेशों को तैयार करने के लिए सीमा को नीचे लाने का प्रस्ताव किया है जो जिसका विरोध करते है।

पीएससीएल ने यह कहते हुए स्थाई आदेशों में छूट का विरोध किया कि हितधारकों के मन में अनिश्चिता पैदा करता है। पीएससीएल में ट्रेड यूनियन के पंजीयन के लिए 45 दिनों की समय सीमा की सिफारिश की है क्योंकि यह आयुक्त ट्रेड यूनियन की और से लम्बे समय से मांग लंबित थी, परन्तु फिर भी एक संशोधन में शामिल नहीं किया गया है। इसी प्रकार अन्य बिन्दुओं का ज्ञापन दिया गया।

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इसी प्रकार इंटक के पदाधिकारियों ने भी एक ज्ञापन श्रमिक विरोधी कानून को वापस लिए जाने को लेकर दिया। इस अवसर पर जितेन्द्र रघुवंशी, हरीशचन्द्र, गजेन्द्रसिंह, इन्द्रजीतसिंह, ओमप्रकाश मौर्य, गुड्डू पहलवान, राजेन्द्रसिंह, रामनारायण, ओमप्रकाश पासवान, भारतसिंह आदि उपस्थित थे।

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