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जीएसटी लागू होने के बाद भी अधिकांश व्यवसायियों ने कच्चे बिल में काम कर रहे

अधिकरियों की मिलीभगत से कार्रवाई नहीं होने के कारण करोड़ों रुपए का चूना लगा दिया

अंबेडकर नगर


जीएसटी लागू होने के बाद भी अधिकांश व्यवसायियों ने कच्चे बिल में काम कर रहे हैं। उन्हें प्रतिदिन के हिसाब से पेनाल्टी भी देना पड़ रहा है। जीएसटी लागू होने के बाद शासन ने यह स्पष्ट कर दिया था, कि क्रय-विक्रय का पूरा हिसाब रिटर्न में देना होगा।

दरअसल मासिक रिटर्न में कारोबारियों को द्वारा खरीदे बेचे गए प्रत्येक उत्पादों का पक्के बिल में हिसाब दिखाना है, कई व्यापारियों की तरफ से कहा गया कि कई बार कंज्यूमर खुद ही बिल नहीं लेते तो इसमें दुकानदार क्या कर सकता है?

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अफसरों ने कहा कि बिल तो देना ही है। कहा कि ज्यादातर सर्राफा शाॅप्स पर बिल नहीं काटा जाता है। जहां पर चाहे सामान 500 रुपए का बेचा जाए या फिर 40 हजार रुपए का, वहां बिल नहीं दिया जाता है। ऑफिसर्स के मुताबिक सिर्फ पक्का बिल ही मान्य होता है। अगर कोई खाली पेज पर लिखकर या कच्चा बिल दे तो ये मान्य नहीं है। इससे सरकार को सामग्री के खरीद बिक्री के विषय में जानकारी ही नहीं हो पाती है। कच्ची बिल देने पर किसी प्रकार का टैक्स नहीं लगा। इस मामले में अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है, जो उनकी इन मामलों में संलिप्तता की ओर इशारा करता है।


अंबेडकर नगर में सर्राफा व्यवसायियों द्वारा टैक्स चोरी का खेल वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है। बोगस बिलिंग के जरिए जीएसटी चोरी करने वाले बाज नहीं आ रहे। लेकिन अधिकरियों की मिलीभगत से कार्रवाई नहीं होने के कारण करोड़ों रुपए का चूना लगा दिया गया।


टैक्स वसूलने वाले बिल कलेक्टर और असिस्टेंट रेवेन्यू ऑफिसर्स भी जानते हैं कि गलत असेसमेंट और टैक्स चोरी क्षेत्रीय अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। बावजूद इसके न तो टैक्स चोरों पर सख्ती हो रही और न ही टैक्स चोरी रुक रही है।

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