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दीपावली हिंदू समाज का सबसे महत्वपूर्ण महोत्सव माना जाता है। दीपावली का महोत्सव 5 दिनों तक मनाया जाता है। जो कि धनतेरस से शुरु होकर भाई दूज पर समापन होता है। 5 दिनों के अलग अलग महत्व है। आज का दिन नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। जोकि समस्त पापों से मुक्ति दिला देता है।

धर्मराज चित्रगुप्त मंदिर के पुजारी राकेश जोशी जी ने बताया आज के दिन धर्मराज चित्रगुप्त जी के आगे दीप जलाया जाता है जोकि हमारे पितरों को यम मार्ग में प्रकाश देने का काम करता है। और उनकी यमराज द्वारा दी जाने वाली यातना से मुक्ति हो जाती है।

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रूप चौदस का महत्व:

नरक चतुर्दशी को रूप चौदस भी कहा जाता है। आज के दिन सौभाग्यवती स्त्रियां नए वस्त्र आभूषण पहनकर सिंगार करके यदि धर्मराज के आगे दीपदान करती हैं तो उनके सौभाग्य में वृद्धि होती है। पुरुष भी स्वच्छ होकर स्नान करके यदि धर्मराज के आगे दीपदान करते हैं तो वर्ष भर यमराज उनकी रक्षा करते हैं।

नरक चतुर्दशी पर पूजा की विधि

आज के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर तेल अभ्यंग उबटन से स्नान किया जाता है। उसके बाद अपने ग्राम नगर क्षेत्र एवं इष्ट देवता की पूजा की जाती है। तत्पश्चात धर्मराज के मंदिर में दीपक प्रज्ज्वलित किया जाता है। अगर नगर में यमराज का मंदिर ना हो तो हनुमान जी के मंदिर में दीपदान और आराधना की जाती है।

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