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राजसमन्द झील राजस्थान के शहर राजसमन्द में स्थित है। इस झील का निर्माण मेवाड़ के राजा राजसिंह ने गोमती नदी का पानी रोककर (1662-76 ई.) करवाया था।

चालीस लाख रुपये की लागत से बनवाई गई राजसमन्द झील मेवाड़ की विशालतम झीलों में से एक है।
इस झील का निर्माण गोमती, केलवा तथा ताली नदियों पर बाँध बनाकर किया गया है।
सात किलोमीटर लम्बी व तीन किलोमीटर चौडी यह झील 55 फीट गहरी है।
राजसमन्द झील की पाल, नौचौकी व इस ख़ूबसूरत झील के पाल पर बनी छतरियों की छतों, स्तम्भों तथा तोरण द्वार पर की गयी मूर्तिकला व नक़्क़ाशी देखकर स्वतः ही दिलवाड़ा के जैन मंदिरों की याद आ जाती है।

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झील के किनारे की सीढ़ियों को हर तरफ़ से गिनने पर योग नौ ही होता है, इसलिए इसे ‘नौचौकी’ कहा जाता है। यहीं पर 25 काले संगमरमर की चट्टानों पर मेवाड़ का पूरा इतिहास संस्कृत में उत्कीर्ण है। इसे ‘राजप्रशस्ति’ कहते हैं, जो की संसार की सबसे बड़ी प्रशस्ति है।


राजप्रशस्ति ‘अमरकाव्य वंशावली’ नामक पुस्तक पर आधारित है, जिसके लेखक रणछोड़ भट्ट तैलंग हैं।
राजसमन्द झील के किनारे पर घेवर माता का मन्दिर है।

कोरोना नामक वैश्विक महामारी के भयानक प्रकोप का कहर विभिन्न पर्यटक स्थलों पर देखा गया है ,जैसा कि हमें ज्ञात है कुछ राज्य के क्षेत्रवासियों की आमदनी का स्रोत वहां स्थित पर्यटक स्थल ही है , पर्यटको के बल पर जीवन यापन करने वाले लोगों का जीवन दिन प्रतिदिन खतरे में पड़ता जा रहा है । यहां पर निवास करने वाले लोकल लोगों की कमाई होटल, रेस्टोरेंट, गाइड, ट्रांसपोर्ट से ही होती थी ऐसे में कोरोना नामक आपदा ने सभी के जीवन को पूर्ण रूप से उजाड़ दिया है


प्राप्त जानकारी में बजरंग सेना चित्तौड़गढ़ जिला अध्यक्ष एवं फ्रीलांसर फोटोग्राफर रोहित सिंह राजपूत ने पर्यटक स्थलों पर वैश्विक आपदा कोरोना के प्रकोप को बताते हुए , पर्यटक स्थलों को आधार मानकर तथा उन पर आश्रित रहकर जीवन यापन करने वाले लोगों पर प्रकाश डालना चाहा है ।


*जानकारी में फ्रीलांसर फोटोग्राफर रोहित सिंह राजपूत ने बताया कि राजसमंद झील की पाल आज से पूर्व इतनी सुनसान कभी नहीं दिखाई पड़ी , पानी की उपस्थिति में सदैव बच्चों एवं बड़ों को नहाते एवं परिवार तथा मित्रों के साथ पाल पर भ्रमण एवं मनोरंजन करते ही पाया गया है ।

राजसमंद झील में मुख्य द्वार से प्रवेश करते समय कुछ उम्रदराज महिलाएं जो अपने साथ आटे की छोटी-छोटी गोलियां बनाकर रखती है तथा राजसमंद झील पर भ्रमण हेतु पधारने वाले प्रत्येक व्यक्ति को वह गोलियों की खरीदारी करने तथा राजसमंद जिले में स्थित मछलियों को खिलाकर पुण्य के भागीदार बनने हेतु मधुर वाणी में आग्रह करती है , और यही ₹10 की दो कटोरी आटे की गोलियां उन महिलाओं के जीवन यापन का स्रोत भी है , वहां कुछ व्यक्ति गाइड के रूप में भी उपस्थित रहते हैं जो पर्यटकों को वहां स्थित प्रत्येक विषय स्थल की जानकारी प्रदान करवाते हैं , वहां स्थित आसपास की कई दुकानें भी पर्यटकों की अनुपस्थिति के कारण बंद होने की कगार पर आ गई है । ऐसी स्थिति में कौन व्यक्ति भामाशाह के रूप में इनकी मदद को आगे आए यह सब से बड़ा चिंतनीय विषय है ।


राजसमंद झील की तरफ मुड़ने से 100 मीटर पहले डेढ़ किलोमीटर की घुमावदार ऊंची चढ़ाई चढ़ने पर वहां एक अन्नपूर्णा माताजी का मंदिर स्थित है , राजा महाराजाओं के समय निर्मित हो हुए इस मंदिर का सुस्पष्ट एवं सटीक मार्ग ना होने की वजह से आमजन को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है परंतु वहां उपस्थित काम करने वालों एवं वहां के निवासी व्यक्तियों से प्राप्त जानकारी में उन्होंने राजसमंद विधायक किरण माहेश्वरी तथा वहां के नगर निगम एवं अन्य अधिकारियों की प्रशंसा करते हुए उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया , जिनकी मेहनत एवं कठोर परिश्रम के फल स्वरूप अन्नपूर्णा माताजी मंदिर तक पहुंचने हेतु अब भक्तजनों को पहाड़ी रास्ते से जाने के बजाए सड़क मार्ग द्वारा सुरक्षित जाने की प्रशंसनीय सहायता प्राप्त हो सकेगी ।

योजना के अंतर्गत फोरलेन पर सेंवाली के पास से मंदिर तक करीब 800 मीटर लम्बी सड़क बनाई जाएगी। डामरीकरण के साथ ही मंदिर के पास ही पार्किंग, टॉयलेट्स आदि भी बनाए जाएंगे। पूरे मार्ग में विद्युतीकरण किया जाएगा, ताकि रात्रि में आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी न हो। सुरक्षा की दृष्टि से रिटेनिंग वॉल भी बनेगी। क्योंकि यह पूरा इलाका वनक्षेत्र है।

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