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शाजापुर। मकर संक्रांति के त्यौहार में अभी भले ही तीन माह का समय है, लेकिन बाजार में पतंगबाजी को लेकर प्रतिबंधित मांझा अभी से बिकने लगा है और इसीके चलते पक्षियों की जीवन पर मौत का संकट मंडराने लगा है। उल्लेखनीय है कि प्रतिबंध के बाद भी पतंग व्यापारी घातक चायना डोर को बेचने से बाज नही आ रहे हैं, और यही कारण है कि शहर में चायना मांझे की जमकर खरीद-फरोख़्त का काम अभी से चल पड़ा है।

बेरोक-टोक होकर बेची जा रही मौत की डोर के नाम से प्रसिद्ध चायना बरेली से शहर में लगातार हादसे भी हो रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी न तो व्यापारी और ना ही आमजन चायना डोर का इस्तेमाल बंद कर रहे हैं। मंगलवार को शहर के छोटे चौक में चायना डोर की चपेट में आने से एक कबूतर घायल हो गया। चौक में मौजूद युवक मोहम्मद हुसैन, अकिल और रफीक ने घायल कबूतर का उपचार कराया और उसे सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि चायना डोर की वजह से कबूतर उसमें कई घंटे से उलझा हुआ था, जिसके कारण उसका पंख बुरी तरह से घायल हो गया।


बेहद घातक है चायना डोर


गौरतलब है कि चायना डोर बेहद घातक है और इसके उपयोग करने पर हर साल दुष्प्रभाव भी देखने को मिलते हैं। बेजुबान जानवरों के साथ ही मानव जीवन को भी चायना डोर से नुकसान उठाना पड़ता है जिसके चलते प्रशासन ने चायना डोर के खरीदने और बेचने को प्रतिबंधित किया हुआ है, लेकिन इसके बाद भी ना तो व्यापारी चायना डोर बेचने से बाज आ रहे हैं और ना ही लोग इसे खरीदने से गुरेज कर रहे हैं। नतीजतन इस वर्ष भी चायना डोर से लोगों के घायल होने और पक्षियों के घायल होने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। इस डोर की वजह से पक्षियों के पंख कटने की घटनाएं सामने आने लगी हैं।

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