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ठेका श्रमिकों के मामले में व्यवहार न्यायालय का आया निर्णय

नागदा जं. निप्र। न्यायालय द्वितीय व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-दो नागदा के विद्वान न्यायाधीश द्वारा 22 अक्टूबर को दिए अपने महत्वपूर्ण फैसले में ठेका श्रमिकों को राहत मिली है। न्यायालय द्वारा वादी ग्रेसिम इण्डस्ट्रीज विरूद्ध प्रतिवादीगण रमेश गौतम, अशोक मीणा, जुझारसिंह, रतनसिंह, कमलेश एवं दिनदयाल चुकरी के मामले में आदेश 39 नियम 1 व 2 को निराकृत करते हुए उक्त आदेश प्रदान किया है।


क्या है मामला

मामले में प्राप्त जानकारी के अनुसार गत वर्ष 10 अक्टूबर 2019 को संपन्न ग्रेसिम उद्योग में कार्यरत श्रमिकों पे-ग्रेडेशन समझौते को सुनाते हुए उद्योग के गेट पर श्रम संगठनों के आगेवानों एवं ठेका श्रमिकों के मध्य विवाद हो गया था। उद्योग ने वाद में बताया था कि विवाद के बाद ठेका श्रमिकों ने उद्योग में कार्यरत स्थायी एवं ठेका श्रमिकों को कार्य पर आने से रोक दिया था तथा उद्योग के गेट पर अप्रिय स्थिति बनाने की कोशिष की थी।

उद्योग द्वारा प्रतिवादीगण के विरूद्ध निषेद्याज्ञा जारी किए जाने की प्रार्थना की थी। माननीय न्यायालय ने प्रतिवादीगण के प्रतिउत्तर, साक्ष्य के आधार पर उक्त फैसला दिया है जिसमें प्रतिवादीगण ने विवाद के दौरान वहाॅं उपस्थित नहीं होने की बात कही है।


संवेधानिक अधिकारों पर न्यायालय ने रोक लगाने से इन्कार किया


माननीय न्यायालय द्वारा पारित फैसले के बिन्दु क्रमांक 18 में स्पष्ट रूप् से उल्लेखित किया है कि जहाॅं तक सुविधा के संतुलन के सिद्धांत का प्रश्न है तो वादी कंपनी की और से आवेदन में यह सहायता भी मांगी गई है कि प्रतिवादीगण वादी कंपनी की निर्माणी से 1000 मीटर तक कोई धरना, भाषणबाजी और कोई टेंट ना लगाये ंतो इस संबंध में सर्वप्रथम यह उल्लेख है कि उक्त कार्य करने का किसी भी व्यक्ति को संवेधानिक अधिकारी है।

न्यायालय द्वारा ऐसे किसी कृत्य पर जो मौलिक अधिकार की श्रेणी में आता है उन पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। उपरोक्त विवेचना में प्रतिवादीगण का कोई सक्रिय भाग तथाकथित घटना दिनांक की उत्पत्ति में किया जाना भी प्रकट नहीं हुआ है ऐसे परिस्थिति में यदि वादी को अस्थाई निषेद्याज्ञा प्रदान की गई तो निश्चित रूप से प्रतिवादीगण को असुविधा होगी क्योंकि उनके संवैधानिक अधिकार प्रभावित होंगे। इसलिये सुविधा के संतुलन का सिद्धांत भी वादी के पक्ष में प्रमाणित होना नहीं पाया जाता है।


फैसले के बाद अभिभाषकों का किया स्वागत


न्यायालय द्वारा फैसला दिए जाने के बाद ठेका श्रमिकों द्वारा उनके पक्ष में पैरवी करने वाले अभिभाषकों का पुष्पमालाओं से स्वागत किया। इस अवसर पर अभिभाषक श्री साहु, संतोष बरखेडावाला एवं अन्य अभिभाषकों का स्वागत किया गया।

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