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उज्जैन में राजा विक्रमादित्य के समय से नगर पूजा की परंपरा चली आ रही है ।चौबीस खंबा माता जी महामाया ,महालाया की पूजा वर्तमान में इस परंपरा का निर्वाह उज्जैन कलेक्टर आशीष सिंह के द्वारा महा अष्टमी पूजा की गई ,इस समय में नगर जिला प्रशासन द्वारा यहां पर पूजा की जाती है इस पूजा में लगभग 27 किलोमीटर तक मदिरा की धार लगाई जाती है ।

इस भ्रमंड के बीच में शहर के 42 मंदिर में पूजा की जाती है इस पूजा में नगर प्रशासन के साथ कई श्रद्धालु पैदल चलते हैं सुबह पर आरंभ होकर शाम तक के समाप्त होती है ।

यह पूजा उज्जैन के प्रसिद्ध महामाया ,महालाया मंदिर से प्रारंभ होकर भैरव मंदिर पर पर चढ़ा कर समाप्त होती है इसकी खास बात यह है कि घड़े में मदिरा को भरा जाता है जिसमें नीचे छेद होता है और जिस से पूरी यात्रा के दौरान सड़क पर मदिरा की धार लगी रहती है इस महापूजा में जिला कलेक्टर के साथ प्रशासन अधिकारी कर्मचारी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं ।

महा अष्टमी के दिन जिला प्रशासन के अधिकारी एवं कर्मचारी देवी मां महामाया महामाया की पूजा की जाती है नगर भ्रमण ढोल नगाड़ों के साथ शुरू हुई बाद में नगर प्रशासन आमला तहसीलदार के नेतृत्व में नगर पूजा का यात्रा निकल पड़ी ।

महामाया,महालाया को मदिरा का प्रसाद चढ़ाया जाता है देवी शक्तियों को चढ़ाए जाने वाली परंपरा को बड़ी संख्या में श्रद्धालु नगर भ्रमण में प्रशासन आमला के साथ पैदल भ्रमण करते हैं।

कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा आज अष्टमी के शुभ अवसर पर मेरे द्वारा यह पूजा की गई है और यह शहर के लिए अत्यंत आवश्यक है शहर की सुरक्षा के लिए, यहां के अधिकारियों के कल्याण के लिए मेरा ऐसा मानना है कि माता का आशीर्वाद के साथ महाकाल का आशीर्वाद के साथ करोना जैसी महामारी के लिए यह पूजा हमारे लिए फल दायक रहेगी ।

बहुत जल्दी वैक्सिंग आने वाली है और महामारी जल्दी ही खत्म होगी।

कलेक्टर आशीष सिंह ने इस अवसर पर नगर वासियों को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं देता हूं

पूर्व काल में राजा विक्रमादित्य पूजा करते थे नगर की रक्षा के लिए नगर के लोगों की स्वस्थ के लिए और किसी प्रकार की उज्जैन में कोई भी तकलीफ ना आए इसलिए कलेक्टर ने यहां आकर नगर पूजा की है नगर पूजा के साथ में यह प्रार्थना की है कि कोरोनावायरस को पूर्ण से मुक्त करा जाए 42 मंदिरों में पूजा होगी नगर भ्रमण के बीच में और यह पूजा भैरव मंदिर में जाकर समाप्त होगी।

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