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  • केवट जैसी निस्वार्थ भाव से करना चाहिए भक्ति
  • व्यक्ति का जीवन अधूरा है प्रेम के बिना, परमात्मा भी चाहता है प्रेम
  • श्री राम कथा में पंडित राधेश्याम दुबे मानस पीयूष ने कहा


सोयतकला 23 अक्टूबर 2020


व्यक्ति का जीवन प्रेम के बिना अधूरा है , इसलिए हमारे जीवन मे प्रेम उल्लास को परिवार के साथ आनंद में रहकर , प्रेम को बढ़ाना चाहिए । परमात्मा भी प्रेम चाहते है । हर मानव प्रेम का भूखा है । भगवान प्रेम के लिए धरती पर सोए । प्रेम अगर जीवन मे नही तो नकारात्मकता हमे घेर लेती है ।प्रभु की भक्ति निस्वार्थ भाव से करनी चाहिए जैसी भरत ओर केवट की थी ।

शुक्रवार को शतचंडी यज्ञ में आहुतियां देते हुए यजमान


उक्त कथा में प्रवचन सरस्वती शिशु मंदिर प्रांगण में धर्म शक्ति जागरण के तत्वावधान में चल रहै शतचंडी यज्ञ एव रामकथा में सातवे दिन शुक्रवार को कथावाचक मानस पीयूष पंडित राधेश्याम दुबे ने कही । कथावाचक दुबे ने आगे कहा कि राम बनवास प्रसंग पर बताया कि प्रभु राम अपने वनवास के लिए अयोध्या से चलते हुए माँ गंगा के किनारे निषादराज केवट के राज्य में पहुँचते है । प्रभु श्री राम केवट से कहते है , मांगी नाव न केवट आना । कहि तुम्हार , मर्म में जाना ।

भक्ति भाव से करें भय से नहीं
कथावाचक ,यज्ञाचार्य और बटुक ब्राह्मण के साथ भक्ति जागरण के कार्यकर्ता

केवट की भक्ति को देखकर प्रभु ने चरण पखारने के लिए हा कहि केवट ने भक्ति भाव से केवट ने चरण पखारकर प्रभु को गंगा पार किया । आगे पण्डित दुबे ने बताया कि । मानव को अच्छे कर्म करना चाहिए । रामायण हमे अच्छे कर्म करने के लिए प्रेरित करती है । कथा में पोथी पूजन यजमान ओम पालीवाल ,राजेश पालीवाल के द्वारा किया गया । इस अवसर पर धर्म शक्ति जागरण के राजेश कुमरावत , जितेन्द्र शर्मा , गिरीश आचार्य , लालचन्द राठौर , नीरज शर्मा ,अमित नागर , बसंत भावसार , निकुंज कुमरावत , राहुल शर्मा उपस्थित थे ।

कथा में उपस्थित महिलाऐं

शतचंडी यज्ञ मैं शुक्रवार को नगर की सुख समृद्धि और विश्व कल्याण के लिए नगर के यजमानो द्वारा आहुतियां दी गई ।

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