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  • अभिमान का धनुष विवाह पूर्व टूट जाना ही श्रेयस्कर
  • शतचंडी महायज्ञ एवं श्री राम कथा के छठे दिन मानस पीयूष कथावाचक दुबे ने कहा

सोयतकला – (राजेश बैरागी) 22 अक्टूबर 2020


जनक की सभा मे राम की जय जयकार होने लगती है । अभिमान का धनुष विवाह कद पूर्व टूट जाना ही श्रेयस्कर है । उक्त प्रवचन कथा वाचक मानस पीयूष राधेश्याम दुबे ने गुरुवार को श्री राम कथा कहे । कथा में आगे बताया कि राम पताका है लक्ष्मण दंड है । भगवान राम ने परशुराम का अहंकार पल भर में तोड़ दिया ।


धर्म शक्ति जागरण के तत्वावधान में चल रहे शतचंडी यज्ञ एव रामकथा में छठे दिन सीता स्वयंवर , राम वनवास की कथा हुई । शिव का धनुष अर्थात अहंकार का धनुष । भगवान राम अहंकार का धनुष तोड़ने जाते है । जैसे ही धनुष टूटता है पूरी सृष्टि में हिल जाती है , हमें सदैव हमारा मन भगवान के नाम मे लगाना चाहिए । राम नाम के स्मरण मात्र से मन और आत्मा की शुद्धि होती है ।

जीवन में कभी अहंकार नही करना चाहिए । राम को वनवास की कथा पर सभी श्रोत्रा गण भाव विभोर हो गए ।


धर्म शक्ति जागरण के तत्वाधान में चल रही शतचंडी महायज्ञ में प्रतिदिन विश्व कल्याण और नगर की सुख समृद्धि के लिए नगर के विभिन्न समाजों द्वारा आहुतियां दी जा रही है ।

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