Domain Registration ID: DD9A736AA76EB45DBBFAF21E3264CDF2D-IN Editor - Neelam Dass, Add. - 105 Jawahar Marg, Ujjain M.P., India - Mob. N. - +91- 8770030644
हैरान कर देगी ये रिपोर्ट
नई दिल्ली/टीम डिजिटल
अक्टोबर-21-2020
कोबरा डिजिटल न्यूज

वायु प्रदूषण वैसे तो हर व्यक्ति के लिए खतरनाक है, लेकिन नवजात शिशुओं को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है। वो बच्चा जिसका इस वायु प्रदूषण को बढ़ाने में कोई हाथ नहीं होता इसकी वजह से अपनी जान गंवा देता है। स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर-2020 ने मंगलवार को एक रिपोर्ट जारी की, जिसके आंकड़े हैरान करने देने वाले हैं। इसके अनुसार बीते वर्ष भारत में 1.16 लाख नवजात शिशुओं की मौत प्रदूषण के कारण हुई।

इन मौतों के दो मुख्य कारण है, एक घरेलू प्रदूषण जिसमें बीते 10 सालों में कमी आई है। दूसरा बाह्य प्रदूषण जो पीएम 2.5 की ज्यादा मात्रा के कारण बढ़ता है। घरेलू प्रदूषण में कमी आने का कारण है स्वच्छ ईंधन का विस्तार होना। बताया जा रहा है कि बीते 10 सालों में घरेलू प्रदूषण के संपर्क में आने वालों की संख्या में पांच करोड़ की कमी हुई है। ये एक सकारात्मक सूचना है।

हर साल 16.70 लाख शिशुओं की मौत

देश में शिशुओं की मौत के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि हर साल 16.70 लाख शिशुओं की मौत होती है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा प्रदूषण के कारण होने वाली मौतों का है, जोकि बेहद दुखद है। रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 में भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान और नेपाल समेत दक्षिण एशियाई देश पीएम-2.5 के स्तर के मामले में शीर्ष 10 पर रहे हैं। घरेलू प्रदूषण भले ही बीते सालों में कम हुआ है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार बाह्य प्रदूषण के कारक पीएम 2.5 में वृद्धि हुी है।

नवजात शिशुओं पर वातारवरण का सीधा असर

जानकारों की मानें तो नवजात शिशुओं के लिए उनके जन्म के बाद का पहला महीना बहुत ही संवेदनशील होता है। इस दौरान उनकी सेहत पर वातावरण का सीधा असर पड़ता है, ऐसे में प्रदूषण के बढ़ते स्तर के साथ उनकी जान को बचाना मुश्किल हो जाता है। कुछ विशेषज्ञो का कहना है कि प्रदूषण के कारण बच्चों को मां के पेट में ही तकलीफ होना शुरू हो जाती है। उनका वजन कम होता है। इसके अलावा समय से पहले जन्म होने की घटनाओं के लिए भी कई बार प्रदूषण ही जिम्मेदार होता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *