Domain Registration ID: DD9A736AA76EB45DBBFAF21E3264CDF2D-IN Editor - Neelam Dass, Add. - 105 Jawahar Marg, Ujjain M.P., India - Mob. N. - +91- 8770030644

आगर से जगदीश परमार की विशेष रिपोर्ट

आगर-मालवा। आगर जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर स्थित गांव बीजानगरी में मां हरसिद्धि का माता मंदिर प्राचीन मंदिर है। जहा विगत 2000 वर्ष से अखंड ज्योत प्रज्जवलित है।यह मंदिर अति प्राचीन होने के साथ साथ चमत्कारी भी है।


मंदिर के पुजारी सोनु व्यास ने बताया कि यहा उज्जैन की प्रसिद्ध माता हरसिद्धि की छोटी बहन के रूप में यहां स्थापित है। मंदिर का निर्माण उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के भानजे विजयसिंह इसी गांव में निवास करते थे। मां हरिसिद्ध के परम भक्त होने के कारण विजयसिंह प्रतिदिन उज्जैन पहुंचकर माता के दर्शन करते थे।

एक बार रात्रि को माता ने उन्हे स्वप्न देकर कहा कि मैं तुम्हारे गांव में ही प्रकट होने वाली हूं तुम मेरा मंदिर बनवा दो तब विजयसिंह ने माता से स्वप्न में ही प्रश्न किया कि मैं आपको पहंचानुंगा कैसे? माता ने बताया कि तुम मंदिर का मुंह पूर्व दिशा की ओर रखना मेरे प्रकट होते ही मंदिर का मुंह पश्चिम की ओर हो जाएगा। और मंदिर निर्माण के बाद यह घटना सत्य साबित हुई। तब से लेकर आज तक लगभग 2 हजार वर्ष से यह ज्योत अखंड रूप से जल रही है।

इसके अलावा नवरात्रि महोत्सव के दौरान दो तपेलो में लगभग 25 क्वटल तेल ज्योत जलाने में लगता है।मंदिर में नवरात्र में राजस्थान, उत्तरप्रदेश सहित प्रदेश के दुर दराज से श्रद्रालु दर्शन करने पहुंचते हैं।और मनोकामना मांगते हैं।

हरिसिंद्धि माता बदलती है दिन में तीन रूप


मंदिर में पुजारी सोनु व्यास ने बताया कि मां हरिसिद्ध मंदिर में दिन में तीन रूप में दर्शन देती है। सुबह बाल्य रूप, दोपहर में योवन तथा शाम होते होते माता का वृद्धावस्था के रूप में दर्श़न देती हुई प्रतीत होती है।

मंदिर प्रांगण में बिखरी पड़ी हैं पुरातत्व संपदा

मंदिर के पुजारी सोनु व्यास ने बताया कि इस ग्राम में जब भी कोई भवन बनाने या कुां खोदने के लिए खुदाई की जाती है तो जमीन के अंदर से प्राचीन मूर्तियां उल्टी सोई हुई निकलती है। जिनमें से अधिकतर मूर्तियां नंदीगण की होती है। कई स्थानो पर खुदाई के दौरान खंडित व अखंडित अनेक प्रतिमाएं मिली हैं, जो इस ग्राम का पुरातात्विक महत्व को साबित करता है।

प्रशासन का मंदिर के प्रति उदासीनता रवैया 


मंदिर प्राचीन होने के साथ साथ चमत्कारी भी है । इसके साबुत बहुत सी बार शासन को मिल चुके हैं। यह मंदिर राज्य पुरातत्व अभिलेख सरक्षण में संरक्षित भी है। फिर भी यहां श्रद्रालु के लिए प्रर्याप्त व्यवस्था नहीं है। मंदिर के पुजारी सोनु व्यास ने बताया कि मेरे द्वारा मंदिर में पानी तथा श्रद्रालु के बैठने हेतु टीन शेड की मांग शासन से की है। साथ ही विगत दिनों आगर कलेक्टर को आवेदन दिया गया था किन्तु यहां सारी व्यवस्था ग्रामीणजनो द्वारा की जाती है। मंदिर के प्रति शासन का रवैया हमेशा उदासीन ही रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *